Thursday, January 9, 2014

तुम मेरे लिय क्या हो



तुम मेरे लिय धीरे धीरे क्या हो...
अगर शब्दों में लिखूं तो सारांश बन रही हो ...
गीतों में कहूं तो ग़ज़ल में ढल रही हो ...
सुबह में सोचूँ तो ठंडी पवन लग रही हो...
और खुद में देखूं तो धडकनों में समा रही हो...
मेरे सपनों की सच्ची तस्वीर हो...
तुम मेरे लिय धीरे धीरे क्या हो...
मै जो ना समझ सका वो कहानी हो तुम ...
नदी की अल्हड जवानी हो तुम ...
कैसे तुम्हे मै सिर्फ सपनों में देखूं ...
मेरे हर पल के मौजों की रवानी हो तुम ...
तुम मेरे लिय धीरे धीरे क्या हो ...

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