"बातें जो दिल से निकलें और दिल को छू जाये... बातें कुछ हमारी और बातें कुछ तुम्हारी"
Sunday, June 21, 2015
तुम .....
"डरता हूँ, तुम कहीं आदत न बन जाओ.. तेज धूप की तपिश से बचने की छाँव न बन जाओ... भोर, सांझ, रात, यादें, धड़कन, साहिल और भी बहुत कुछ न बन जाओ... डरता हूँ, तुम कही मन के घर में घरौंदा न बन जाओ"
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