"कुछ छोटी सी बातें सिमटी है , यादों में तेरी ...
सुबह शाम की छोटी छोटी आंखमिचौली,
चाय, लंच, डिनर में लिपटे शब्द ...
कुछ सच्चे, कुछ झूठे, कुछ लोगों के साए ...
साथ नही हो तुम कभी, लेकिन बातों में है पूरा दिन साथ हमारे....
खट्टी मीठी यादों की बेरी में तुम भी समा गए दोस्त मेरे...
वो चाय, वो काफी के चैट...
खाना न खाके, खाने की बाते करना ...
मिलते तो शायद कुछ और होता, ना मिले तो बातें पूरी हुयी...
कैसा रहा दिन, क्या क्या किया,
अगैर - वगैर जैसे मेरे उटपटांग से सवाल ...
सच कहता हूँ बहुत याद आयेंगे, मुझको वो लम्हे ...
छोड़ गए जो घरौंदे की दीवारों में अपने रंग...
कुछ छोटी सी बातें सिमटी है, यादों में तेरी"
सुबह शाम की छोटी छोटी आंखमिचौली,
चाय, लंच, डिनर में लिपटे शब्द ...
कुछ सच्चे, कुछ झूठे, कुछ लोगों के साए ...
साथ नही हो तुम कभी, लेकिन बातों में है पूरा दिन साथ हमारे....
खट्टी मीठी यादों की बेरी में तुम भी समा गए दोस्त मेरे...
वो चाय, वो काफी के चैट...
खाना न खाके, खाने की बाते करना ...
मिलते तो शायद कुछ और होता, ना मिले तो बातें पूरी हुयी...
कैसा रहा दिन, क्या क्या किया,
अगैर - वगैर जैसे मेरे उटपटांग से सवाल ...
सच कहता हूँ बहुत याद आयेंगे, मुझको वो लम्हे ...
छोड़ गए जो घरौंदे की दीवारों में अपने रंग...
कुछ छोटी सी बातें सिमटी है, यादों में तेरी"

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