Monday, October 10, 2011


एक अनजाने भय से,

अक्सर मै सहमा रहता हूँ ,

कहीं अकेला न पड़ जाऊ,

इसलिय यादों की नीवं को ,

मजबूत बनाने की कोशिश करता हूँ,

ये मानकर चलता हूँ ,

कोशिश में तुम भी बराबर हो , मेरे साथ,

साथ चलोगी, जानता हूँ , बहुत ज्यादा न सही ,

पर कुछ तो , वही बहुत है मेरे लिय,

किस मोड़ पर छोड़ दोगी साथ मेरा, नही जानता ,

पर रास्ते तो मोड़ के आगे भी हैं,

कैसे चल पाऊंगा, तुम्हारे बिना,

चाहता हूँ,

इसलिय तुमसे कुछ पल, कुछ निशानियाँ, कुछ यादें,

और कुछ यादों को याद करने वाली सजीवता ,

ताकि रात में किसी तारे को देख कर नम ना हो जाएँ आँखे मेरी

तुम्हारी यादें, निशानियाँ .....

अवलम्बन होगीं, मेरे लिय

मोड़ के आगे के रास्तों की मंजिल होगी .....

इसलिय दे दो कुछ पल, कुछ निशानियाँ, कुछ यादें.....

Monday, August 29, 2011


समय का क्या है वो तो कृष्ण कि तरह छलिया है

कभी धूप तो कभी साया घना है,

तुम कहते हो जरा ठहरो राह में,

विश्राम करो इस छाव में,

पर सोचो……

उस धूल भरी पगडंडी के उसपार मेरा घरौंदा है,

वो भी तो इस गतिशील समय की लीला है,

न सोचा था की कभी घिर जायेंगे बादल उदासी के,

और न रहेंगे तथ्य कोई गुज़ारिश के,

हर मोड़ महाभारत सा लगता है,

हर कदम पर पार्थ को तलाशता है,

समय का क्या है वो तो कृष्ण कि तरह छलिया है,

Monday, March 21, 2011

अकेलापन




लिखा करो, अच्छा लगता है, तुमने कहा.....

पर क्या लिखूं.....

तुम्हारे किसी भी स्याह दिन से

ज्यादा उदास हूँ मै आज.....

तुम अल्हड नदी की तरह

मुझ सीपी 'जिसकी मोती हो तुम' को

बहा लायी बहुत दूर अपने साथ,

पर अकेला हूँ आज किनारे संग.....

सब रंग तो है इस मौसम में

फिर भी मन की दीवारें धुंदली क्यों हैं.....

कुछ जानी अनजानी गलतियाँ

बना गयी दूरियां क्यूँ .....

कपोलें तो प्रेम की रहीं फूटती हर पल

पर जाने पतझड़ में क्यूँ उलाझा मन.....

महसूस किया मन ने हर बेचैनी को

शायद न दे पाया आकार शब्दों का.....

पर उम्मीदें है मुझको भी

आज नही तो कल, इस पल नही तो उस पल

तुम फिर मुझे बहा लोगी, भर दोगी हर रंग

मेरे इस जीवन

मेरे इस जीवन में.....

Tuesday, February 22, 2011

वजह



हर मोड़ पर कदम रुक जातें हैं ,

हर मोड़ सवाल सा लगता है ,

क्या करूं बार बार दिल ये पूछता है

मुस्कुराने की वजह खुद से तलाश करता है,

किसी से कुछ कह भी नही पाता ,

हर बात सुन लेने की वजह  सोचता है ..............

Thursday, February 17, 2011

हम



तुम्हारे विचारों का प्रारंभ हूँ ,

               हर धड़कन की प्रतिध्वनि हूँ मै,

दिन के उजाले में साया हूँ

               अंधेरों में तुम्हारा हिस्सा हूँ मै,

गुस्से में छिपी मिठास हूँ

             तुम्हारे पलकों का प्यार हूँ मै,

बीते समय के सुखद सलवटें हूँ

              यादों को सजीव करने वाली मंजरी हूँ मै,

रात की लोरी हूँ

             नींद में तुम्हारा सपना हूँ मै,

अनमोल पलों की मूर्त सीपी हूँ

              गिरते हुए कदमो को संभालने का बल हूँ मै,

भोर की पहली किरण हूँ मै

               तुम्हारे लिय निशा की असीम शांति हूँ मै,

अकेला नही यह 'मै'

             सारांश 'हम' का है ,

इसलिय तुम्हारे विचारों का प्रारंभ हूँ मै................
...

Monday, December 6, 2010

मन के भाव






तुमको रोते देखा तुमको हँसते पाया,



निश्छल से  भाव देखे मन का गुरु मंथन देखा,

कभी थोड़ा सरल पाया कभी सवालों की काया में लिपटे पाया,



तुमको रोते देखा तुमको हँसते पाया,



राहों में सुकून में पाया मोड़ो पर बेचैन पाया,

मन की लहरों को शब्दों में देखा आँखों में छिपी गहराई  को पाया ,



तुमको रोते देखा तुमको हँसते पाया,



कभी चट्टान सा पाया तो कभी मोम सा पिघला पाया,
मै खुद अबुझ पहेली हूँ  पर क्या तुम मुझसे भी ज्यादा ,
ये मै खुद अभी जान न पाया ,



तुमको रोते देखा तुमको हँसते पाया,

Saturday, November 27, 2010

यूँ देखना तुम्हारा....



मै कहता हूँ , ऐसे मुझे मत देखो ,

                तुम कहती हो क्यों ,

क्या पहले कभी किसी ने नही देखा ,

                मै नजरें फेर लेता हूँ , सोचता हूँ ,

क्यों देखती हो तुम मुझे ऐसे ,

              प्यार दोस्ती आकर्षण किस रूप में देखती हो ,

तुम्हारी नजरें घरौंदा न बना ले , मेरे मन में ,

              डर जाता हूँ , तुम जानती हो न ,

घरौंदे बहुत अरमानो से बनते हैं , कई बने भी हैं , दोस्ती के,

               इन घरौदों का क्या , एक बार बन गए तो,

बस पूरी जिंदगी साथ निभाते हैं ,

              धूप- छावं की तरह ,

बहुत गहरी पैठ होती है , दोस्त यादो घरौंदों की ,

              इतनी बातें, यादें लेकर चलता हूँ कि,

समुद्र सा लगने लगता है यह घरौंदा,

                 सहम जाता  हूँ, कहीं मंथन न हो जाये ,

तिनको के समान , ओस कि बूंदों के समान ,

                  उड़  ना जाये, बिखर न जाये

फिर तुम्हारी यादें  भी तो हैं , मेरे साथ ,

               नही खोना चाहता हूँ , उन्हें ,

वो बिन कहे, बिन सुने, गुजरे पल

                 ये मात्र मै जानता हूँ

मैंने उन पलों को जिया,

                उन पलों ने कब घरौंदा बनाया, नही जानता

लेकिन घरौंदा बना जरुर , मेरे मन में

                  इस लिए कहता हूँ , डरता हूँ  ऐसे मुझे मत देखो ...........